स्व. चंदूलाल चंद्राकर का योगदान छत्तीसगढ़ के इतिहास में अतुलनीय : अय्यूब खान

स्व. चंदूलाल चंद्राकर का योगदान छत्तीसगढ़ के इतिहास में अतुलनीय : अय्यूब खान

छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी सचिव अय्यूब खान ने स्व  चंदूलाल चंद्राकार के निवास ग्राम कोलिहापूरी निवास में पहुंच कर 31वी पुण्यतिथि शामिल होकर नमन किया स्वर्गीय चंदुलाल चंद्राकर जी के जीवनी विषय बताया कि 
2 फरवरी 1995 – यह वह दिन था जब छत्तीसगढ़ की माटी ने अपने एक सपूत को खो दिया। लेकिन स्वर्गीय चंदूलाल चंद्राकर का जीवन केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है; यह एक ऐसे युग का दस्तावेज है जब निर्भीक पत्रकारिता, निस्वार्थ राजनीति और समाज सेवा एक साथ मिलकर राष्ट्र निर्माण का कार्य करते थे। उनकी पुण्यतिथि पर, हम उस महान व्यक्तित्व को नमन करते हैं जिन्होंने छत्तीसगढ़ का नाम देश और दुनिया में रोशन किया।
जन्म और प्रारंभिक जीवन: निपानी की माटी से राष्ट्रीय मंच तक
1 जनवरी 1921 को दुर्ग जिले के छोटे से गांव निपानी में एक साधारण कृषक परिवार में जन्मे चंदूलाल चंद्राकर का बचपन सादगी और संघर्ष की कहानी है। जहां अधिकांश बच्चे खेल-कूद में व्यस्त होते हैं, वहीं बालक चंदूलाल की रुचि पढ़ाई के साथ-साथ ग्रामीणों की समस्याओं को समझने और उनका समाधान खोजने में थी।


उनकी प्राथमिक शिक्षा सिरसाकला में हुई। बचपन से ही मेधावी चंदूलाल केवल पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी सदैव अग्रणी रहते थे। उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा नागपुर से और बी.ए. की पढ़ाई रॉबर्टसन कॉलेज, जबलपुर से पूरी की।

स्वतंत्रता संग्राम: देशभक्ति की अग्निपरीक्षा
कॉलेज के दिनों में ही चंदूलाल चंद्राकर राष्ट्रीय आंदोलन की धारा में कूद पड़े। वर्ष 1942 में जब महात्मा गांधी ने “भारत छोड़ो आंदोलन” का आह्वान किया, तो युवा चंदूलाल ने बिना किसी हिचकिचाहट के इस ऐतिहासिक आंदोलन में भाग लिया।

उनकी देशभक्ति का परिणाम यह हुआ कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन परीक्षा के समय उन्हें रिहा कर दिया गया, जिससे वे अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। यह घटना उनके जीवन का एक निर्णायक मोड़ थी – जहां एक ओर शिक्षा का महत्व था, वहीं दूसरी ओर देश के प्रति कर्तव्य। चंदूलाल ने दोनों को संतुलित करते हुए अपना जीवन आगे बढ़ाया।
पत्रकारिता: शब्दों का शिल्पी, सत्य का सिपाही
पढ़ाई पूरी करने के बाद चंदूलाल चंद्राकर बनारस चले गए। यहीं से उनकी पत्रकारिता की शुरुआत हुई। पहले उन्होंने दैनिक ‘आज’ के साथ काम किया, फिर ‘आर्यावर्त’ के संवाददाता बने।

महात्मा गांधी की प्रशंसा
1945 से उनकी पत्रकारिता ने नई ऊंचाइयां छूनी शुरू कीं। कांग्रेस के मुंबई अधिवेशन की उनकी कवरेज इतनी प्रभावशाली थी कि स्वयं महात्मा गांधी ने उनकी प्रशंसा की। यह किसी भी युवा पत्रकार के लिए सर्वोच्च सम्मान था।7
‘हिंदुस्तान टाइम्स’ के संपादक देवदास गांधी – जो महात्मा गांधी के पुत्र थे – ने अपने पिता के आदेश पर चंदूलाल को ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ में नियुक्त किया। यह उनकी पत्रकारिता यात्रा का स्वर्णिम अध्याय था।


निर्भीक और बेबाक पत्रकारिता
चंदूलाल चंद्राकर की पत्रकारिता की सबसे बड़ी विशेषता थी उनकी निर्भीकता। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने युद्धस्थल से भी बिना डरे समाचार भेजे। उन्होंने नौ ओलंपिक खेलों और तीन एशियाई खेलों की रिपोर्टिंग की। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने विश्व के लगभग सभी देशों की यात्रा की।

दैनिक हिंदुस्तान के संपादक
राष्ट्रीय अखबार ‘दैनिक हिंदुस्तान’ के संपादक के रूप में चंदूलाल चंद्राकर ने इतिहास रच दिया। वे छत्तीसगढ़ से राष्ट्रीय समाचार पत्र के संपादक पद पर पहुंचने वाले प्रथम व्यक्ति थे। उनकी लेखनी से ज्वलंत मुद्दे उठते थे, बहस की गुंजाइश तैयार होती थी। वे केवल समाचार नहीं लिखते थे, बल्कि समाज में जागरूकता और चेतना का संचार करते थे।
पत्रकार संगठनों में नेतृत्व

1964 से 1970 तक वे भारत की प्रेस एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे। 1975 से 1978 तक प्रेस कर्मचारी फेडरेशन के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने पत्रकारों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उनकी पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं थी, बल्कि समाज सेवा का एक माध्यम थी।
राजनीतिक जीवन: जनसेवा की नई यात्रा

श्रमिक आंदोलन में योगदान
राजनीति में प्रवेश से पहले चंदूलाल चंद्राकर ने श्रमिक आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1978 से वे भिलाई इस्पात कारखाने के इस्पात मजदूरों के यूनियन के अध्यक्ष बने। श्रमिकों के अधिकारों के लिए उनका संघर्ष उल्लेखनीय था।

लोकसभा में पांच बार का प्रतिनिधित्व
1970 से 1991 तक चंदूलाल चंद्राकर ने दुर्ग लोकसभा क्षेत्र से पांच बार सांसद के रूप में जनता की सेवा की। यह उनकी लोकप्रियता और जनता के प्रति समर्पण का प्रमाण था। दुर्ग की जनता ने बार-बार उन पर विश्वास जताया और उन्हें अपना प्रतिनिधि चुना।

केंद्रीय मंत्री के रूप में उपलब्धियां
चंदूलाल चंद्राकर का राजनीतिक जीवन केवल सांसद बने रहने तक सीमित नहीं था। उन्हें केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंपे गए:
1. पर्यटन और नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री (जून 1980 – जनवरी 1982)
इस महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए उन्होंने भारतीय पर्यटन को बढ़ावा देने और नागरिक उड्डयन क्षेत्र के विकास में योगदान दिया।
2. कृषि एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री (जनवरी 1985 – जनवरी 1986)
किसान परिवार से आने वाले चंदूलाल चंद्राकर के लिए यह पद विशेष महत्व रखता था। उन्होंने किसानों की समस्याओं को गहराई से समझा और उनके समाधान के लिए नीतियां बनाईं।

कांग्रेस पार्टी में योगदान
1982 में चंदूलाल चंद्राकर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव बने। पार्टी संगठन में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी। वे नीति निर्माण और पार्टी संगठन को मजबूत करने में सक्रिय रहे।

*छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन में चंदूलाल चंद्राकर की अग्रणी भूमिका निभाई 
छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन के इतिहास में स्वर्गीय चंदूलाल चंद्राकर का नाम स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है। पं. सुंदरलाल शर्मा, डॉ. खूबचंद बघेल और ठाकुर रामकृष्ण सिंह जैसे दिग्गज नेताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते हुए चंदूलाल चंद्राकर ने इस ऐतिहासिक आंदोलन को गति और दिशा प्रदान की। उन्होंने छत्तीसगढ़ के अलग राज्य निर्माण के लिए केवल नारेबाजी नहीं की, बल्कि जमीनी स्तर पर व्यापक जन जागृति अभियान चलाया। गांव-गांव जाकर सभाएं कीं, बैठकें आयोजित कीं और लोगों को छत्तीसगढ़ की अलग पहचान, संस्कृति और विकास की आवश्यकता के प्रति जागरूक किया। राष्ट्रीय स्तर के पत्रकार और पांच बार सांसद रहने के कारण उन्हें मिली दिल्ली की गलियारों तक पहुंच का उपयोग उन्होंने छत्तीसगढ़ की आवाज को संसद और देश के शीर्ष नेताओं तक पहुंचाने में किया। उनके पास छत्तीसगढ़ राज्य के लिए एक स्पष्ट विजन था – वे चाहते थे कि छत्तीसगढ़ कृषि विकास, विशेषकर बागवानी के क्षेत्र में अग्रणी बने। आज दुर्ग जिले का सब्जी और फल उत्पादन में छत्तीसगढ़ में शीर्ष स्थान उनकी इसी दूरदृष्टि का परिणाम है। भिलाई के औद्योगिक विकास में भी उनकी अहम भूमिका रही। स्वर्गीय मिनी माता के साथ मिलकर उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया। यद्यपि 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ – जो उनके निधन के पांच वर्ष बाद था – लेकिन इस ऐतिहासिक उपलब्धि की नींव में चंदूलाल चंद्राकर का योगदान अविस्मरणीय और अतुलनीय है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, जो चंदूलाल चंद्राकर को अपना राजनीतिक गुरु मानते हैं, ने उनके योगदान को स्वीकार करते हुए कहा है कि “छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण में स्वर्गीय श्री चंदूलाल चंद्राकर का योगदान अतुलनीय है।” आज जब हम अलग छत्तीसगढ़ राज्य की उपलब्धियों को देखते हैं, तो हमें उन अग्रदूतों को स्मरण करना चाहिए जिन्होंने इस सपने को साकार करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। चंदूलाल चंद्राकर उन्हीं अग्रणी योद्धाओं में से एक थे जिन्होंने छत्तीसगढ़ की अस्मिता और अस्तित्व की लड़ाई लड़ी।

युवाओं के प्रेरणास्रोत

उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का अनंत स्रोत है। एक साधारण गांव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना, बिना किसी भाई-भतीजावाद के अपनी योग्यता के बल पर सफलता प्राप्त करना – यह आज की युवा पीढ़ी के लिए अनुकरणीय है।

विरासत और स्मृति
चंदूलाल चंद्राकर फेलोशिप
छत्तीसगढ़ शासन ने निर्भीक पत्रकारिता से छत्तीसगढ़ का नाम देश में रोशन करने वाले इस महान व्यक्तित्व की स्मृति में पत्रकारिता के क्षेत्र में “चंदूलाल चंद्राकर फेलोशिप” स्थापित की है। यह पुरस्कार मूल्य आधारित पत्रकारिता को प्रोत्साहन देने के लिए दिया जाता है।

शैक्षणिक संस्थानों का नामकरण
उनके सम्मान में कई शैक्षणिक संस्थानों का नामकरण किया गया है:
चंदूलाल चंद्राकर शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, धमधा
चंदूलाल चंद्राकर शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय, पाटन
ये संस्थान युवाओं को शिक्षित करते हुए चंदूलाल चंद्राकर के आदर्शों को भी प्रसारित कर रहे हैं।