“पटवारी आईडी हैक कर जमीन ट्रांसफर! शैलेश जैन का दावा, निखिल द्विवेदी बोले—यह गंभीर भ्रष्टाचार है”

“पटवारी आईडी हैक कर जमीन ट्रांसफर! शैलेश जैन का दावा, निखिल द्विवेदी बोले—यह गंभीर भ्रष्टाचार है”

राजनांदगांव।लखोली निवासी शैलेश जैन ने आज प्रेस रिपोर्टर क्लब राजनांदगांव में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भुईंया पोर्टल की हैकिंग से जुड़ा बड़ा घोटाला उजागर किया। उनका आरोप है कि पटवारी की यूज़र आईडी हैक कर उनकी करोड़ों की पुश्तैनी जमीन किसी और के नाम दर्ज कर दी गई।
 *तीन महीने तक शिकायत दबाए रखी गई* 

शैलेश जैन के मुताबिक, उन्होंने तीन महीने पहले ही तकनीकी गड़बड़ी और हैकिंग की शिकायत कर दी थी, लेकिन विभाग ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया।
जैन का आरोप—
“जब तक हम दस्तावेज़ लेकर सामने नहीं आए, तब तक प्रशासन ने आंखें बंद रखीं।”
 *फर्जी नामांतरण: 115 के तहत चाचा के नाम चढ़ाई 73 डिसमिल जमीन* 

सबसे बड़ा खुलासा यह कि बिना आवेदन के ही 115 के तहत उनकी जमीन 73 डिसमिल, उनके चाचा के नाम दर्ज कर दी गई।
सवाल वही—
बिना आवेदन के नामांतरण कौन करता है—सिस्टम या सिस्टम में बैठे लोग?
 *फौती कराने पहुंचे तो खुला पूरा घोटाला* 

मां के निधन के बाद फौती कराने पहुंचे जैन को पता चला कि उनकी जमीन पहले ही किसी और के नाम चढ़ाई जा चुकी थी।
उनका बयान—
“हम गए फौती कराने, और पाया हमारी जमीन किसी और की हो चुकी थी।”
 *एनआईसी ने हैकिंग की पुष्टि—फिर भी छह महीने तक सन्नाटा* 

एनआईसी ने यह पुष्टि की कि पटवारी आईडी का अनधिकृत उपयोग किया गया था।
सवाल उठता है—
इतनी बड़ी डिजिटल हेराफेरी को छह महीने तक किसने दबाकर रखा 
 
*विभाग में हड़कंप—जैन द्वारा दस्तावेज़ सामने रखने के बाद अचानक सक्रियता* 

जैसे ही जैन ने तकनीकी सबूतों व दस्तावेज़ों के साथ मामला प्रेस के सामने रखा, राजस्व विभाग हरकत में आ गया।
फाइलें खुलीं, अधिकारी सक्रिय हुए और जांच शुरू की गई।
 *कांग्रेस नेता निखिल द्विवेदी नेकी निष्पक्ष जांच की मांग* 

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद कांग्रेस नेता निखिल द्विवेदी ने इसे प्रशासनिक विफलता बताते हुए कहा—
“यह सिर्फ एक परिवार की जमीन का मामला नहीं, यह पूरे जिले की डिजिटल सुरक्षा का सवाल है।
अगर पटवारी की आईडी हैक हो सकती है, तो कल किसी भी नागरिक की जमीन गायब हो सकती है।
यह गंभीर भ्रष्टाचार है और इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी ही चाहिए।”
उन्होंने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई और पोर्टल की सुरक्षा मजबूत करने की मांग की।

 *शैलेश जैन ने स्पष्ट रूप से मांग की—* 

पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच
हैकिंग व फर्जी नामांतरण में शामिल सभी लोगों की पहचान
दोषियों पर कठोर कार्रवाई
भुईंया पोर्टल की डिजिटल सुरक्षा को बुलेटप्रूफ किया जाए

 *नागरिकों में बढ़ी चिंता—“आज उसकी जमीन, कल किसी और की?”* 

इस मामले ने आम नागरिकों में भय का माहौल बना दिया है। लोग पूछ रहे हैं—
“जब सरकारी पोर्टल ही सुरक्षित नहीं, तो जनता की जमीन कैसे सुरक्षित रहेगी?”