बैंक खाते किराए पर देकर कमा रहे थे पैसा, साइबर ठगी से जुड़े 3 आरोपी जेल भेजे गए

बैंक खाते किराए पर देकर कमा रहे थे पैसा, साइबर ठगी से जुड़े 3 आरोपी जेल भेजे गए

दुर्ग/ साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए दुर्ग पुलिस द्वारा चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना नेवई पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी में प्रयुक्त म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के खातों में लाखों रुपये के संदिग्ध और अनाधिकृत ट्रांजेक्शन पाए गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर केंद्रीय जेल दुर्ग भेज दिया गया है।पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित समन्वय पोर्टल तथा पुलिस मुख्यालय से प्राप्त सूचना के आधार पर थाना नेवई क्षेत्र में संचालित केनरा बैंक के खातों की जांच की गई। जांच के दौरान पता चला कि विभिन्न साइबर ठगी मामलों में ठगी की रकम कुछ संदिग्ध खातों में जमा की गई थी, जो म्यूल खातों के रूप में उपयोग किए जा रहे थे।
जांच में सामने आया कि वर्ष 2024 से 2026 के बीच इन खातों के माध्यम से साइबर ठगी से प्राप्त राशि को प्राप्त कर अन्य खातों में स्थानांतरित किया गया तथा नकद आहरण कर अवैध आर्थिक लाभ अर्जित किया गया। मामले में पुलिस ने 99 संदिग्ध खाताधारकों के विरुद्ध अपराध क्रमांक 306/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(2), 318(3) एवं 318(4) के अंतर्गत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की।
विवेचना के दौरान बैंक से प्राप्त केवाईसी दस्तावेज, खाता विवरण और ट्रांजेक्शन स्टेटमेंट का परीक्षण किया गया। परीक्षण में आरोपियों के खातों में लाखों रुपये के अनाधिकृत लेन-देन पाए गए। साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने 13 जून 2026 को तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने बैंक खाते, पासबुक, एटीएम कार्ड और मोबाइल सिम अन्य व्यक्तियों को साइबर ठगी से संबंधित अवैध वित्तीय लेन-देन के लिए उपलब्ध कराए थे। इसके बदले उन्हें आर्थिक लाभ भी प्राप्त हुआ था।
  गिरफ्तार आरोपी-
  पवन दास मानिकपुरी
  करण रंगारी
  नरेन्द्र कुमार साहू
   जप्त सामग्री-
   केनरा बैंक की पासबुक
   एटीएम कार्ड
   मोबाइल सिम कार्ड
   बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज
साइबर ठगी की रकम के लिए इस्तेमाल हो रहे थे खाते
पुलिस के अनुसार आरोपियों द्वारा अपने बैंक खातों को साइबर अपराधियों के लिए उपलब्ध कराया गया था। इन खातों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त रकम को ट्रांसफर करने और निकालने के लिए किया जा रहा था। इस प्रकार के खातों को "म्यूल अकाउंट" कहा जाता है, जिनका उपयोग साइबर अपराधी अपनी पहचान छिपाने के लिए करते हैं।
इन पुलिसकर्मियों की रही सराहनीय भूमिका
कार्रवाई में एसीसीयू टीम एवं थाना नेवई के निरीक्षक अनिल कुमार साहू, आरक्षक रवि बिसाई और आरक्षक प्यारे लाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।