डाटा एंट्री जॉब के नाम पर ₹39.33 लाख की ठगी, उत्तराखंड से दो आरोपी गिरफ्तार

डाटा एंट्री जॉब के नाम पर ₹39.33 लाख की ठगी, उत्तराखंड से दो आरोपी गिरफ्तार

भिलाई/डाटा एंट्री का काम दिलाने, डाटा रिकवर करने और पेमेंट रिलीज कराने के नाम पर ₹39,33,560 की कथित ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले में दुर्ग पुलिस ने उत्तराखंड से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, नेहरू नगर, भिलाई निवासी 57 वर्षीय राजेश कुमार चौरसिया ने 2 जुलाई 2026 को थाना सुपेला की चौकी स्मृतिनगर में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। प्रार्थी ने बताया कि अक्टूबर 2025 में इंडिया मार्ट के माध्यम से मोबाइल नंबर पर संपर्क कर उसे नोएडा, उत्तर प्रदेश स्थित ग्रीन रेस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में डाटा एंट्री का काम दिलाने की बात कही गई थी। इसके बाद कंपनी के साथ एग्रीमेंट कर मेडिकल, स्टील कारोबार, कंस्ट्रक्शन और इंपोर्ट-एक्सपोर्ट से संबंधित डाटा एंट्री का काम शुरू कराया गया।
शिकायत के मुताबिक, काम के दौरान डाटा करप्ट होने की बात कहकर उसे ठीक करने के लिए विभिन्न सॉफ्टवेयर टूल्स खरीदने के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराई गई। इस तरह प्रार्थी के आईडीएफसी बैंक खाते से कुल ₹39,33,560 की राशि छलपूर्वक प्राप्त कर ली गई।
तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उत्तराखंड पहुंची पुलिस
प्रार्थी की शिकायत पर थाना सुपेला, चौकी स्मृतिनगर में अपराध क्रमांक 935/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 3(5) में अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। जांच के दौरान आरोपियों के बैंक खातों और मोबाइल नंबरों से संबंधित तकनीकी जानकारी का विश्लेषण किया गया। इसके आधार पर पुलिस टीम ने उत्तराखंड के नैनीताल जिले के हल्द्वानी में आरोपियों की लोकेशन का पता लगाया।
पुलिस टीम ने हल्द्वानी से राम निवास (42 वर्ष), निवासी जिला बरेली, उत्तर प्रदेश, वर्तमान निवासी कमलुआगांजा, हल्द्वानी तथा राहुल बिष्ट (23 वर्ष), निवासी सर्वोदय कॉलोनी, हल्द्वानी को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त दो मोबाइल फोन जब्त किए गए। आवश्यक वैधानिक कार्रवाई के बाद दोनों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
डाटा रिकवरी के नाम पर रकम जमा कराने का आरोप
प्रारंभिक शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने डाटा एंट्री का काम उपलब्ध कराने के बाद डाटा करप्ट होने की बात कही और उसे रिकवर करने तथा सॉफ्टवेयर टूल्स खरीदने के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराई। इस तरीके से प्रार्थी से लाखों रुपये की कथित धोखाधड़ी किए जाने का आरोप है। मामले में आरोपियों की भूमिका और अन्य तथ्यों की विवेचना जारी है।
दुर्ग पुलिस की अपील
दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि डाटा एंट्री जॉब, घर बैठे कमाई अथवा ऑनलाइन काम दिलाने के नाम पर किसी भी व्यक्ति या कंपनी पर भरोसा करने से पहले उसकी वैधता की जांच करें। डाटा रिकवरी, सॉफ्टवेयर, पेमेंट रिलीज या अन्य तकनीकी सेवाओं के नाम पर अनजान व्यक्तियों द्वारा मांगी गई राशि बिना सत्यापन के जमा न करें। साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल संबंधित बैंक को सूचना दें और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या आधिकारिक वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।