बीएसपी में आउटसोर्सिंग के नाम पर निजीकरण को बढ़ावा, प्रमुख विभागों को ठेके पर देना भी निजीकरण का ही रूप : मुकेश चंद्राकर

बीएसपी में आउटसोर्सिंग के नाम पर निजीकरण को बढ़ावा, प्रमुख विभागों को ठेके पर देना भी निजीकरण का ही रूप : मुकेश चंद्राकर

भिलाई /जिला कांग्रेस कमेटी भिलाई के अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर ने भिलाई इस्पात संयंत्र में आउटसोर्सिंग के नाम पर प्रमुख विभागों को निजी हाथों में सौंपे जाने पर चिंता जताते हुए कहा कि संयंत्र को निजी हाथों में दिए जाने और बेचे जाने की आशंका से भिलाईवासियों की चिंता बेवजह नहीं है। संयंत्र प्रबंधन इन खबरों का खंडन कर रहा है, लेकिन यदि प्लांट का निजीकरण नहीं किया जा रहा है तो आउटसोर्सिंग के नाम पर एक-एक कर विभागों को ठेकेदारों के हवाले क्यों किया जा रहा है? उनका कहना है कि संयंत्र के महत्वपूर्ण विभागों को ठेके पर देना भी निजीकरण को बढ़ावा देने जैसा है।
मुकेश चंद्राकर ने कहा कि संयंत्र प्रबंधन चाहे जितना इंकार करे, लेकिन प्लांट को ठेकेदारों के भरोसे चलाना निजीकरण की दिशा में उठाया गया कदम है। आशंका है कि भविष्य में इन ठेकेदारों को अडानी समूह के अधीन कर दिया जाएगा। इसलिए ठेका प्रथा तत्काल बंद की जाए और स्थानीय युवाओं को स्थायी रोजगार देने के लिए नियमित भर्ती की जाए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा संयंत्र के भविष्य को लेकर जताई गई आशंका अपनी जगह सही है। जिस तेजी से प्लांट के विभाग निजी हाथों में सौंपे जा रहे हैं, उससे भविष्य में पूरे संयंत्र को किसी एक निजी कंपनी के हाथों में सौंपे जाने की आशंका बढ़ती है। प्लांट के भीतर और सेक्टर-9 अस्पताल में विभिन्न कार्यों को ठेके पर दिया जा रहा है, लेकिन भाजपा के किसी सांसद या विधायक ने इसका विरोध नहीं किया। ऐसे में जब कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतर रही है तो भाजपाइयों को परेशानी हो रही है।
चंद्राकर ने कहा कि यदि संयंत्र प्रबंधन प्लांट के विभागों का संचालन स्वयं करने में सक्षम है तो उन्हें निजी हाथों में सौंपने की जरूरत क्यों पड़ रही है? स्थायी कर्मचारियों की संख्या लगातार कम हो रही है, जबकि अस्थायी ठेका श्रमिकों की संख्या बढ़ती जा रही है। यदि यही स्थिति बनी रही तो एक दिन पूरा संयंत्र ठेका श्रमिकों और ठेकेदारों पर निर्भर हो जाएगा। ऐसी स्थिति संयंत्र के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने मांग की कि भिलाई इस्पात संयंत्र के भीतर और बाहर ठेका प्रथा को धीरे-धीरे पूरी तरह समाप्त किया जाए। दुर्ग, भिलाई, राजनांदगांव, रायपुर और आसपास के क्षेत्रों के युवाओं को स्थायी कर्मचारियों के रूप में भर्ती किया जाए। वर्तमान में कार्यरत ठेका श्रमिकों को भी नियमित करने की दिशा में कदम उठाए जाएं, ताकि स्थानीय युवाओं को स्थायी रोजगार मिल सके और संयंत्र की व्यवस्था मजबूत बनी रहे।
कोक ओवन बैटरी निजी हाथों में देने की तैयारी का आरोप
मुकेश चंद्राकर ने आरोप लगाया कि भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन कोक ओवन बैटरी क्रमांक 5 एवं 6 का संचालन निजी हाथों में देने की तैयारी कर रहा है। उनके अनुसार, अप्रैल माह में स्टील मेल्टिंग शॉप-3, लाइटनिंग प्रोटेक्शन सिस्टम और दूरसंचार विभाग को निजी हाथों में देने के लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं। ऑक्सीजन प्लांट और पावर प्लांट पहले ही निजी हाथों में दिए जा चुके हैं।
उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में रावघाट लौह अयस्क खदान और अग्निशमन विभाग को भी निजी हाथों में सौंपा जा सकता है। इसी तरह सेक्टर-9 मुख्य अस्पताल की लॉन्ड्री, एंबुलेंस और साफ-सफाई की व्यवस्था पहले ही आउटसोर्सिंग के तहत दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि अस्पताल का कार्डियोलॉजी विभाग निजी डॉक्टरों के भरोसे है और उपलब्ध जानकारी के अनुसार रेडियोलॉजी विभाग, सीटी स्कैन तथा एमआरआई सेवाओं को भी निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है।चंद्राकर ने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि भिलाई और आसपास के क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था, रोजगार तथा पहचान का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए संयंत्र के विभागों को ठेके पर देने के बजाय स्थायी कर्मचारियों की भर्ती की जाए और स्थानीय युवाओं के रोजगार एवं संयंत्र के सार्वजनिक स्वरूप को सुरक्षित रखने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।