जिला न्यायालय महिला कर्मियों का किया सम्मान

जिला न्यायालय महिला कर्मियों का किया सम्मान

दुर्ग। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के आदेश के पालन में महिलाओं के सशक्तिकरण एवं उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य पर शनिवार 7 मार्च को जिला न्यायालय दुर्ग में एक गरिमामय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। उक्त कार्यक्रम महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति माननीय मुख्य न्यायाधिपति, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय रमेश सिन्हा के प्रेरणादायी विचारों से प्रेरित होकर आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य न्यायालयीन परिसर में कार्यरत महिला कर्मियों के योगदान को सम्मानित करना तथा महिला सशक्तिकरण के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम के दौरान जिला न्यायालय दुर्ग के वरिष्ठ महिला कर्मचारीगण को उनके दीर्घकालीन सेवाकाल, कर्तव्यनिष्ठा एवं उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर न्यायालय परिवार के सदस्यों ने महिला सशक्तिकरण एवं समानता के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में प्रथम व्यवहार न्यायाधीश, वरिष्ठ श्रेणी के चतुर्थ अतिरिक्त न्यायाधीश, दुर्ग द्वारा अपने संबोधन में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए महिलाओं के अधिकारों एवं सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण विधिक प्रावधानों की जानकारी दी गई। उन्होंने विशेष रूप से घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अधिनियम महिलाओं को घरेलू हिंसा से संरक्षण प्रदान करने तथा उनके सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकार को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इसके अतिरिक्त सप्तदश व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ श्रेणी, दुर्ग द्वारा इस वर्ष के अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की थीम "गिव टू गेन" पर अपना प्रेरणादायक वक्तव्य प्रस्तुत किया गया। अपने उद्बोधन में उन्होंने बताया कि समाज में सहयोग, संवेदनशीलता और परस्पर सम्मान की भावना को बढ़ावा देकर ही वास्तविक प्रगति और सशक्तिकरण संभव है।
इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दुर्ग द्वारा अपने संदेश में कहा गया कि महिलाओं का सम्मान, सुरक्षा एवं समान अवसर सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सहभागिता से समाज और न्याय व्यवस्था अधिक संवेदनशील एवं सशक्त बनती है। उन्होंने अपने संदेश में घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 जैसे महत्वपूर्ण कानूनों का उल्लेख करते हुए महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही इस वर्ष के अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की थीम "गिव टू गेन" का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में सम्मान, सहयोग और संवेदनशीलता प्रदान करने से ही एक सशक्त एवं समतामूलक समाज का निर्माण संभव है।
कार्यक्रम में जिला अधिवक्ता संघ, दुर्ग की महिला प्रतिनिधि ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं के सम्मान, अधिकारों और समान अवसरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता समुदाय महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उन्हें न्याय दिलाने के लिए सदैव प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम का समापन उपस्थित सभी न्यायिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा महिला सम्मान और समानता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करने के साथ हुआ। उक्त कार्यक्रम में महिलाओं को पुरुष अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा गुलाब का फूल एवं चॉकलेट भेंट कर सम्मानित किया गया। साथ ही अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का संदेश एवं इस वर्ष की थीम "गिव टू गेन" को प्रदर्शित करती हुई आकर्षक रंगोली एवं हैंड क्राफ्ट डिजाइन भी बनाई गई तथा प्रतिभागियों के लिए एक सेल्फी जोन भी तैयार किया गया।