बौद्धिक संपदा अधिकारों से अकादमिक शोध का संरक्षण जरूरी: दुर्ग कॉलेज में तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ

बौद्धिक संपदा अधिकारों से अकादमिक शोध का संरक्षण जरूरी: दुर्ग कॉलेज में तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ

दुर्ग/शासकीय वाई.टी. पी.जी. स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग के जूलॉजी विभाग द्वारा आईक्यूएसी  एवं आईआईसी के बैनर तले तथा रूसा के प्रायोजन में “आईपीआर एवं डेटा विश्लेषण” विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ गुरुवार को हुआ।
कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में छत्तीसगढ़ काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी , रायपुर के साइंटिस्ट  'डी'  डॉ. अमित दुबे मुख्य अतिथि एवं प्रथम दिवस के रिसोर्स पर्सन के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी प्राचार्य डॉ. अभिषेक सुराना ने की। वहीं स्वायत्त प्रकोष्ठ की समन्वयक डॉ. जगजीत कौर सलूजा विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना, राष्ट्रीय गीत एवं राज्य गीत से हुआ। कार्यशाला की संयोजक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. दिव्या के. मिंज ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कार्यशाला के उद्देश्य एवं महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान शोध परिदृश्य में वैज्ञानिक आंकड़ों का उचित विश्लेषण तथा शोध से प्राप्त नवीन विचारों एवं उपलब्धियों का बौद्धिक संपदा अधिकारों के माध्यम से संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है।उद्घाटन के पश्चात प्रथम दिवस के रिसोर्स पर्सन डॉ. अमित दुबे ने आईपीआर विषय पर विस्तृत एवं उपयोगी व्याख्यान दिया। प्रथम सत्र में उन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकार की अवधारणा, आवश्यकता तथा इसके विभिन्न घटकों के बारे में जानकारी दी। भोजनावकाश के पश्चात आयोजित द्वितीय सत्र में उन्होंने विशेष रूप से पेटेंट की अवधारणा, शोध एवं नवाचार में उसकी उपयोगिता तथा शोध परिणामों के संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला।कार्यशाला के अंत में आयोजित इंटरैक्टिव सेशन में स्नातकोत्तर विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए आईपीआर एवं पेटेंट से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे। डॉ. दुबे ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए व्यावहारिक जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी प्राची चंद्राकर ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ.संजू सिन्हा ने किया।