प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के मनरेगा बचाओ संग्राम पदयात्रा में लगातार साथ चल रहे हैं अय्यूब खान
दुर्ग/ छत्तीसगढ़ में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे एवं देश के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के निर्देश पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व छत्तीसगढ़ प्रदेश अलग अलग जिले में मनरेगा बचाओ संग्राम पदयात्रा निकाली जा रही है जिसके तहत रायपुर जिला के कौशल्याधाम
ग्राम चन्द्रखुरी से विधानसभा रायपुर तक, एवं राजनांदगांव जिले चल रही यात्रा शामिल होकर अय्यूब खान न पदयात्रा किया।
आगे जानकारी देते हुये बताया पदयात्रा के दौरान आनेवाले सभी ग्रामों में ग्रामीणों से संपर्क चौक चौराहा, बाजार और पंचायतों छोटी बड़ी सभा किया जा रहा है प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष दीपक बैज सहित स्थानीय कांग्रेस नेतागण संबोधन कर जानकारी दे रहे मनरेगा कानून में परिवर्तन कर मोदी सरकार का श्रमिक विरोधी कदम है। यह महात्मा गांधी के आदर्शों पर कुठाराघात है, मजदूरों के अधिकारों को सीमित करने वाला निर्णय है। मोदी सरकार ने “सुधार” के नाम पर झांसा देकर लोकसभा में एक और बिल पास करके दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी स्कीम मनरेगा को खत्म कर दिया है। यह महात्मा गांधी की सोच को खत्म करने और सबसे गरीब भारतीयों से काम का अधिकार छीनने की जान-बूझकर की गई कोशिश है।अब तक, मनरेगा संविधान के आर्टिकल 21 से मिलने वाली अधिकारों पर आधारित गारंटी थी। नया फ्रेमवर्क ने इसे एक कंडीशनल, केंद्र द्वारा कंट्रोल की जाने वाली स्कीम में बदल दिया है। मनरेगा गांधीजी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और डिसेंट्रलाइज्ड डेवलपमेंट के सपने का जीता-जागता उदाहरण था, लेकिन इस सरकार ने न सिर्फ उनका नाम हटा दिया है, बल्कि 12 करोड़ मनरेगा मज़दूरों के अधिकारों को भी बेरहमी से कुचला है। दो दशकों से, मनरेगा करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए लाइफलाइन रहा है और कोविड-19 महामारी के दौरान आर्थिक सुरक्षा के तौर पर ज़रूरी साबित हुआ है। अब तक मनरेगा मजदूरों को काम देने का कानून था, श्रमिक अधिकार पूर्वक मांग करते थे, जिसे योजना में परिवर्तित कर दिया गया, अब इसे चलाना/नहीं चलाना सरकार की मर्जी पर निर्भर होगा। दुर्ग जिले में पूर्व में कांग्रेस सरकार के दौरान मनरेगा के तहत 42 लाख मानव दिवस सृजन का लक्ष्य था इसे पिछले साल घटाकर 32 लाख मानव दिवस कर दिया गया था अब वित्तीय वर्ष 2025-26 इसे और घटाकर 18 लाख मानव दिवस सृजन का लक्ष्य दिया गया है जबकि जिले में सक्रिय मनरेगा मजदूरों की संख्या ही डेढ़ लाख है इसी प्रकार वर्तमान में मनरेगा के तहत जिले के मात्र 10 हजार मनरेगा मजदूरों को मनरेगा के तहत चल रहे कार्यों में काम मिल रहा है जबकि अन्य वर्षों में इस समय 40 से 50 हजार मजदूर जिले में मनरेगा के तहत कार्यरत होते थे मनरेगा के तहत काम नहीं मिलने से अनेक ग्रामीण मजदूरों को काम की तलाश में छत्तीसगढ़ से पलायन करने मजबूर होंगे।मोदी सरकार अब 50,000 करोड़ का बोझ डालना चाहती है, उन्हें 40 प्रतिशत खर्च उठाने के लिए मजबूर किया जा रहा हैमनरेगा योजना देश के गरीब से गरीब लोगों के लिए रोजगार का सहारा थी, जो कोरोना जैसे मुश्किल हालातों में भी उनके साथ थी। इसलिए ये बिल गरीब मजदूरों के खिलाफ है।100 दिन से 125 दिन की मजदूरी वाली बात सिर्फ एक चालाकी है, वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 70 प्रतिशत गांव में भाजपा की सरकार आने के बाद से अघोषित तौर पर काम नहीं दिया जा रहा है। पिछले 11 सालो में मोदी सरकार बनने के बाद मनरेगा में काम देने का राष्ट्रीय औसत मात्र 38 दिनों का है। मतलब 11 सालो में मोदी सरकार किसी भी साल 100 दिन काम नहीं दे पाई.मनरेगा काम करने का सही अधिकार था, उसे अब एक एडमिनिस्ट्रेटिव मदद में बदला जा रहा है, जो पूरी तरह से केंद्र की मर्जी पर निर्भर है। मनरेगा बचाओ संग्राम पदयात्रा में अय्यूब खान, वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेंद्र चंद्राकर, अभिषेक शर्मा, पुरुषोत्तम सोनवानी, जसवंत गायकवाड़, मोहम्मद रफीक खान, सौरभ द्विवेदी, केशव सिन्हा, दुर्ग के कांग्रेस के नेता पदयात्रा किये l