अचानकमार टाइगर रिजर्व में रिश्वत कांड: रेंजर और डिप्टी रेंजर 50 हजार लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
बिलासपुर/ बिलासपुर एसीबी की टीम ने मुंगेली जिले में बड़ी ट्रैप कार्रवाई करते हुए अचानकमार टाइगर रिजर्व के दो वन अधिकारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।एसीबी बिलासपुर ने सुरही रेंज में कार्रवाई करते हुए रेंजर पल्लव नायक और डिप्टी रेंजर मनीष श्रीवास्तव को 50 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ा। रिश्वत की यह रकम चालान पेश करने और जप्त वाहन छोड़ने के एवज में मांगी गई थी।शिकायतकर्ता अजीत कुमार वैष्णव ने एसीबी को बताया कि दिसंबर 2025 में उसके वाहन को जप्त किया गया था। जमानत के बाद जब वह मामले में कार्रवाई के लिए पहुंचा, तो उससे 70 हजार रुपए रिश्वत की मांग की गई। शिकायत के सत्यापन के बाद एसीबी ने ट्रैप बिछाया और आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ लिया।कोटा के मित्र मिलन रेस्टोरेंट में जैसे ही डिप्टी रेंजर ने रिश्वत की पहली किस्त 50 हजार रुपए ली, एसीबी टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। मौके पर मौजूद रेंजर की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई।इस कार्रवाई के बाद अचानकमार टाइगर रिजर्व में पहले से चल रहे विवाद भी फिर सामने आने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लग रहे हैं कि पूर्व में हुए गोलीकांड के दौरान भी आरोपियों को पकड़ने में देरी हुई थी और उन्हें कथित तौर पर वीआईपी ट्रीटमेंट दिया गया था।सूत्रों के मुताबिक, उस समय भी वन विभाग के कुछ अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे थे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मामले में उच्च अधिकारियों तक मिलीभगत की आशंका जताई गई थी। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मौजूदा ट्रैप कार्रवाई के बाद एक बार फिर विभाग की कार्यप्रणाली जांच के घेरे में आ गई है।एसीबी ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही यह भी संकेत दिए हैं कि जांच का दायरा और बढ़ सकता है।फिलहाल इस पूरे मामले में एसीबी की कार्रवाई के बाद वन विभाग में हड़कंप है और अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में आगे और किन-किन नामों का खुलासा होता है।