विट्ठलपुरम की काव्य संध्या में गूंजी सामाजिक सरोकारों की आवाज, स्व. तीजन बाई को दी गई काव्यांजलि
भिलाई/साहित्यकार डॉ. प्रेम कुमार पांडेय के विट्ठल पुरम, एफ-ब्लॉक 503 भिलाई-तीन स्थित आवास पर काव्य संध्या का आयोजन 18 जुलाई की शाम किया गया। आयोजन में कई राष्ट्रीय स्तर के ख्याति प्राप्त कवियों, गीत कारों और कलमकारों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुख्य अतिथि विजया भारती थी। अध्यक्षता दिव्या सक्सेना ने की। समारोह का संचालन कवि गजेंद्र द्विवेदी ने किया।
काव्य संध्या में पारुल पांडेय ने अपनी रचना 'शौक' का पाठ किया। संजय मैथिल ने अपनी कविताओं 'मोबाइल भावनाओं से दूर' और 'जमाने वाले' के माध्यम से समाज की दुर्बलताओं पर करारी चोट की। युसूफ सागर ने 'बात पते की बोल गया हूँ' और 'ये दुनिया पागलखाना है' के जरिए पारिवारिक मूल्यों का चित्रण किया। रियाज़ खान गौहर ने अपनी रचना 'जिंदगी भर वो जलाते रहे' से महफ़िल में समां बांध दिया। मनमोहन मतवाला ने अपनी पंक्तियों 'यूं तो जज्बात लिए चलता हूँ' से दर्शकों का दिल जीता और अपने गीत 'मन झूमता है' के जरिए स्व. तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रहे ओम पांडेय ने अपनी कविताओं 'रंगमंच' और 'कोहरा' के माध्यम से समाज की वर्तमान स्थिति पर प्रासंगिक प्रश्न खड़े किए। डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ने 'बरसात के आलम का गुजर देख रहा हूँ', हंसता हुआ मैं 'खुद पे नगर देख रहा हूं। जैसी बेहतरीन रचनाओं से श्रोताओं को आनंदित किया। छगनलाल सोनी ने अपनी क्षणिकाओं 'मतदान लोकतंत्र की हार का महा उत्सव' और 'हवा एक विचारधारा है' से सभी का ध्यान आकर्षित किया। संतराम वर्मा ने मंच पर जगदीश चक्रधारी की रचना को बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत किया। संचालन कर रहे गजेंद्र द्विवेदी ने अपनी रचना 'दिन रात का क्या है गुजर ही जायेगा' से श्रोताओं का मन मोह लिया। डॉ. आर.बी. कुशवाहा की रचना 'विश्व गुरु' पर सदन में जमकर तालियां बजीं। समापन करते हुए डॉ. प्रेम कुमार पांडेय ने अपनी रचनाओं 'भूख' और 'पाखंड' के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं पर गहरा व्यंग्य किया। इस दौरान जयप्रकाश अग्रवाल, सुजाता और प्रतिमा पाण्डेय सहित अन्य लोग उपस्थित थे। सभी का आभार प्रतिमा पांडेय ने व्यक्त किया।