जन्मभूमि से कर्मभूमि तक: सेक्टर-9 अस्पताल के मेडिकल हेड बने डॉ. उदय

जन्मभूमि से कर्मभूमि तक: सेक्टर-9 अस्पताल के मेडिकल हेड बने डॉ. उदय

भिलाई। सेल-भिलाई स्टील प्लांट के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं विभाग में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. उदय ने मेडिकल हेड की जवाबदारी एक अगस्त शनिवार से संभाल ली है। डॉ. उदय के साथ सुखद संयोग यह जुड़ा है कि उनका जन्म भी इसी सेक्टर-9 अस्पताल में हुआ था, जहां की अब वे कमान संभाल चुके हैं। शनिवार एक अगस्त को उन्होंने इस्पात भवन जाकर निदेशक प्रभारी चित्तरंजन महापात्र, कार्यपालक निदेशक  तथा अन्य वरिष्ठ  अधिकारियों से मुलाकात की और इसके बाद जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र सेक्टर-9 पहुंच कर विभाग प्रमुख का कार्यभार संभाला। देर शाम तक उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। 
उल्लेखनीय है कि डॉ. उदय के पिता भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा से लेकर 11वीं कक्षा तक की पढ़ाई भिलाई इस्पात संयंत्र के सेक्टर-6 स्थित स्कूलों में हुई। इसके बाद उन्होंने कल्याण कॉलेज से बीएससी प्रथम वर्ष की पढ़ाई की और पीएमटी में चयनित होकर रायपुर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस एवं एमएस की डिग्री प्राप्त की। 
वर्ष 1994 में उन्होंने जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र, सेक्टर-9 में मेडिकल ऑफिसर के रूप में बर्न विभाग में अपनी सेवाएं शुरू कीं। वर्ष 2013 में बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने विभाग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। 
उनके नेतृत्व में भिलाई का बर्न विभाग मध्य भारत के सर्वश्रेष्ठ बर्न विभागों में शामिल हुआ। डॉ. उदय कुमार की पहल पर भिलाई इस्पात संयंत्र के बर्न विभाग में मध्य भारत का पहला तथा सेल का पहला स्किन बैंक स्थापित किया गया। इस स्किन बैंक के माध्यम से अब तक सैकड़ों गंभीर रूप से झुलसे मरीजों की जान बचाई जा चुकी है। 
चिकित्सा क्षेत्र के साथ-साथ डॉ. उदय कुमार ने अभिनय के क्षेत्र में भी अपनी विशेष पहचान बनाई। उन्होंने बॉलीवुड की हिंदी फिल्म 'रमाई' में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। 
अपनी सरलता, मुस्कुराते हुए सद्भावपूर्ण व्यवहार और मरीजों के प्रति समर्पण के कारण डॉ. उदय आमजन के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं। गंभीर रूप से जले मरीजों के सफल उपचार में उनकी विशेषज्ञता के चलते मरीज और उनके परिजन उनकी सलामती के लिए मंदिरों में कथा-यज्ञ आयोजित करते हैं तथा दरगाहों पर चादर भी चढ़ाते हैं। चिकित्सा सेवा के अलावा डॉ. उदय कुमार पिछले 32 वर्षों से लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में निःशुल्क चिकित्सा शिविर लगाकर जरूरतमंदों की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने झिरिया पारा, रूआबांधा बस्ती को गोद लेकर वहां शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता के क्षेत्र में विकास का ऐसा मॉडल तैयार किया, जिसकी पूरे छत्तीसगढ़ में सराहना की जाती है। डॉ. उदय कुमार का जीवन चिकित्सा, समाजसेवा और मानवीय संवेदनाओं का ऐसा प्रेरणादायी उदाहरण है, जिसने हजारों लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है।